एक गांव में एक छोटी नीची जाति की अछूत कन्या थी | अभी वह छोटी बच्ची थी और उसे बचपन से ही सिखाया जा रहा था, कि झुक कर रहना है | स्वीकार करना है | सवाल नहीं करना है | नजरें नहीं उठानी है | समाज में हमारी जगह नहीं है | हमें केवल सेवा करनी है | ज्ञान हमारे लिए नहीं है | किसी भी तरह का ज्ञान हमें नहीं सीखना है |
वह छोटी बच्ची थी इसलिए जैसा कि बच्चों का स्वभाव होता है | वह हर चीज में क्यों लगाती थी | क्यों हमें नहीं सीखना है, क्यों हमें झुक कर रहना है, क्यों हमें छिपकर रहना है | ऐसे ही सवाल वह हमेशा अपनी मां से पूछती | मां केवल इतना ही कहती | यह हमारे पिछले जन्म का पाप कर्म है | जिस कारण हम अछूत हैं और अछूतों की जिंदगी ऐसी ही होती है |
धीरे-धीरे वह लड़की बड़ी होने लगी | लेकिन वह क्यों वाला स्वभाव उसका नहीं बदला | जिसके कारण उसे कई बार मार खानी पड़ी | एक दिन उसने देखा कि एक गुरु कुछ लड़के-लड़कियों को नृत्य और गायन सिखा रहे थे | उनका सुंदर नृत्य और गाना सुन कर उसके मन में भी नृत्य करने और गाना सीखने की चाहत पैदा हो गई |
वह उस गुरु के पास गई और कहा – गुरुवर मुझे भी गाना और नृत्य सीखना है | क्या मुझे सिखाएंगे ?
गुरु ने कहा – तुम किस घराने से ताल्लुक रखती हो, किस जाति से हो |
लड़की ने कहा – मैं अछूत हूं, नीची जाति से हूं |
यह सुनते ही गुरु का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया और उस युवती को धक्के मार कर वहां से निकाल दिया | और कहा – आगे से यहां आने की आवश्यकता नहीं | ज्ञान तुम लोगों के लिए नहीं है | मेरे आश्रम को भ्रष्ट करने की आवश्यकता नहीं है | अगर तुम आगे से यहां दिखाई दी, तो मैं तुम्हारी खाल खिंचवा लूंगा |
वह युवती वहां से चली गई | लेकिन उसके मन में नृत्य गाना सीखने की चाहत बढ़ती चली गई | अतः उसने चोरी छुपे लड़के और लड़कियों को नृत्य और गाना सीखते हुए देखा | वह जैसा देखती वैसा ही अभ्यास अकेले में जाकर करती | और 2 वर्ष की मेहनत के बाद वह गायन और नृत्य में पारंगत हो गई | लेकिन यह बात किसी को नहीं पता थी |
1 दिन उस राज्य की राजकुमारी एक मार्ग से जा रही थी | उस राजकुमारी को अपने कुछ कपड़े पसंद नहीं आए | तब उसने रास्ते में वह कपड़े फेंक दिए | उस मार्ग से वह लड़की भी जा रही थी | उसने उन कपड़ों को देखा तो उठा लिया | उसे वह कपड़े अच्छे लगे तो उसने वह पहन लिए | उन कपड़ों को पहनकर वह राजकुमारी से भी सुंदर लग रही थी | उस समय नगर में एक मेला चल रहा था | उसने सोचा कि इन कपड़ों को पहनकर उस मेले में जा सकती हूं | तब मुझे कोई नहीं पहचानेगा | उसने ऐसा ही किया और वह मेले में पहुंच गई | मेले में एक जगह नृत्य और गायन चल रहा था | उनका नृत्य और गाना देखकर उसके मन में भी गाने की इच्छा उत्पन्न हुई | अतः वह मेले से थोड़ी दूर जाकर एकांत में गाने लगी |
तभी उसकी आवाज एक व्यक्ति ने सुनी और वह उस आवाज के पीछे खिंचा चला आया |
उसने उस लड़की से कहा – तुम्हारी आवाज बहुत मधुर है | क्या तुम मेरे लिए इस मेले में एक बार गा सकती हो | मैं तुम्हें, जो तुम कहोगी, उतना धन दे दूंगा |
लड़की ने कहा – नहीं, नहीं, मुझे गाने की इजाजत नहीं है | मैं नहीं गा सकती | उस व्यक्ति ने बहुत प्रार्थना की और अधिक से अधिक धन देने का वादा किया|
लड़की ने कहा – मैं धन दौलत के लिए गाना नहीं गाती | केवल अपने लिए गाती हूं | फिर भी जब तुम इतना कह रहे हो, तो मैं तुम्हारे लिए भी एक बार गाना गा सकती हूं | उस लड़की ने मेले में गाना गाया | उसकी आवाज सुनकर लोगों ने उसकी बहुत सराहना की | उसकी आवाज राजा के एक अधिकारी ने भी सुनी | तब उसने सोचा कि इस लड़की को मैं राजा के पास ले जाता हूं | इसका गाना सुनकर राजा अवश्य ही बहुत प्रसन्न होंगे | और वह मुझसे बहुत खुश हो जाएंगे |
उस अधिकारी ने लड़की से कहा – तुम बहुत अच्छा गाती हो | क्यों नहीं तुम राजा के समक्ष गाती | देखना राजा अवश्य ही प्रसन्न हो जाएंगे और जो तुम्हें चाहिए वहीं मिलेगा |
लड़की ने कहा – क्या जो भी मैं चाहूं, वह राजा दे सकते हैं |
अधिकारी ने कहा – हां क्यों नहीं, अगर राजा प्रसन्न हो जाए तो क्या नहीं दे सकते |
लड़की ने कहा – लेकिन तुम मेरे बारे में नहीं जानते पहले मेरे बारे में जान तो लो |
अधिकारी ने कहा – कलाकार की पहचान उसकी कला से ही होती है | और तुम एक कलाकार हो इससे ज्यादा क्या हो सकता है |
लड़की ने कहा – क्या वाकई राजा, जो मैं मांगू, दे सकते हैं |
अधिकारी ने फिर से कहा – हां, हां, कह तो दिया जो चाहिए मिलेगा | लेकिन इसके लिए राजा का प्रसन्न होना आवश्यक है |
लड़की ने कहा तो फिर ठीक है मैं चलती हूं आपके साथ | मुझे कुछ राजा से मांगना है | और अवश्य ही वह मेरा गाना सुनकर प्रसन्न हो जाएंगे | वह अधिकारी इस लड़की को राजा के दरबार में ले गया |
और राजा से कहा- महाराज आपने एक से बढ़कर एक गायक देखे होंगे | सब के गाने भी सुने होंगे | लेकिन जो आवाज इस लड़की के पास है | वह किसी के पास नहीं | एक बार इस लड़की का गाना सुनकर देख लीजिए |
राजा ने कहा – जब तुम इतना यकीन से कह रहे हो, तो कोई ना कोई बात तो होगी ही | ठीक है, लड़की से कहो कि वह गाना गाए | हम देखेंगे कि यह किस तरह से बेहतर है |
उस लड़की ने राजा के सामने दरबार में गाना गाया, गाना सुनकर सब बड़े खुश हुए | राजा भी अपने आप को प्रशंसा करने से रोक नहीं पाया | उसने इस लड़की की बहुत प्रशंसा की, और खुश होकर अपनी गले का हार निकालकर उस लड़की को दे दिया |
और कहा कि तुम जो चाहे मांग सकती हो | हम तुम्हें दे देंगे |
लड़की ने कहा – क्या यह सच है कि जो मैं मांगू कि वह मुझे मिलेगा |
राजा ने कहा – हां क्यों नहीं, मांग कर देखो, दो चाहोगी मिलेगा |
लड़की ने कहा – राजन हर गांव के बाहर एक बस्ती है | उस बस्ती में नीची जाति के अछूत लोग रहते है | उन्हें भी पढ़ने लिखने और ज्ञान प्राप्त करने का अधिकार दे दीजिए |
राजा ने कहा – तुम्हारा मन बहुत अच्छा है | लेकिन यह अधिकार हम उन्हें नहीं दे सकते | यह सब उनके पिछले जन्मों पाप कर्म है | जिस कारण उन्हें भुगतना पड़ रहा है | और तुम क्यों उन अछूतों की बात कर रही हो | तुम अपने लिए कुछ मांगो |
लड़की ने कहा – राजन मैं भी एक अछूत कन्या ही हूं | और आपने कहा था | जो मांगूंगी मिलेगा तो मुझे मिलना चाहिए |
लड़की की यह बात सुनकर कि वह एक अछूत कन्या है | वहां बैठे सभी लोग हैरान हो गए | एक अछूत कन्या राजसभा में आई कैसे | राजा ने अधिकारी की तरफ देखा |
अधिकारी ने कहा – महाराज इस कन्या की वेशभूषा देखिए | यह देखने में राजकुमारी की तरह दिखती है | इसने मुझे धोखा दिया है | यह कपड़े अछूतों के नहीं है | इसी कारण में धोखा खा गया |
वहां बैठे सभी लोग चिल्लाने लगे – महाराज अछूत कन्या ने पाप किया है | इसे दंड मिलना चाहिए | इसे तो राज महल के सामने से भी नहीं गुजरना चाहिए था | यह तो राज महल में ही आ गई | और आपके सामने, इसकी खड़े होने की हिम्मत कैसे हुई | कुछ लोगों ने उसे मारने के लिए तलवार निकाल ली |
यह सब होता देख लड़की ने राजा से कहा – महाराज मुझे न्याय चाहिए |
न्याय की बात सुनते ही राजा के एक मंत्री ने कहा – न्याय तुम्हारे लिए नहीं | न्याय आम प्रजा के लिए है | तुम जैसे अछूतों के लिए कोई न्याय नहीं है | महाराज मैं तो कहता हूं | जो अपराध इसने किया है | कोई आगे से ऐसा ना करें, इसलिए इसको, भयंकर से भयंकर, मृत्यु दंड मिलना चाहिए |
राजा ने कहा – उचित है ऐसा ही होगा | अभी के अभी इसे हाथियों के पैरों तले कुचलवा दो | यह हमारी आज्ञा है | तब ही सभी के साथ न्याय होगा |
लड़की ने कहा – महाराज यह कैसा न्याय है | यह तो अन्याय है | आप ऐसा नहीं कर सकते | आपने वादा किया था | जो मैं मांगूंगी वह देंगे |
राजा ने लड़की की एक भी नहीं सुनी | लड़की ने हिम्मत की और वह तुरंत वहां से भाग गई |
राजा ने तुरंत लड़की को पकड़ लाने के लिए कहा और वह खुद भी उस लड़की को पकड़ने के लिए उस लड़की के पीछे गया |
लड़की भागते हुए एक मार्ग से जा रही थी | वह थक गई थी और नीचे गिर पड़ी | तभी किसी ने उस लड़की को उठाया, लड़की ने देखा कि उसके सामने तथागत गौतम बुद्ध है |
तथागत गौतम बुद्ध ने उस लड़की को उठाया और पूछा – पुत्री क्या हुआ ? तुम इतनी भयभीत क्यों हो ?
लड़की ने कहा – मैं एक अछूत कन्या हूं | नीची जाति की हूं | इस कारण राजा ने मुझे मृत्युदंड दिया है | वह मुझे हाथियों के पैरों तले कुचलवा देना चाहता है | लड़की ने अपने ऊपर बीती हुई सारी घटना तथागत गौतम बुद्ध को बताई |
बुद्ध ने कहा – पुत्री तुम बहुत साहसी हो | तुम यहीं रुको तुम्हें कुछ नहीं होगा |
राजा के सैनिक लड़की को ढूंढते हुए वहां पर पहुंचे और बुध से कहा – हे बुद्ध यह लड़की अपराधी है | इसे मृत्युदंड दिया गया है | आप इसका संरक्षण ना करें | इसे हमें ले जाने दे |
बुद्ध ने कहा – इसे यहां से केवल तुम्हारा राजा ही ले जा सकता है |
जब यह बात राजा को पता चली तो वह बुध के पास आया और कहा – हे बुद्ध यह लड़की अपराधी है | इसे मैंने मृत्युदंड दिया है | कृपया इसे हमें ले जाने दे |
बुद्ध ने कहा – क्या अपराध है | इस लड़की का |
राजा ने कहा – यह नीची जाति की अछूत कन्या है | और इसने इतना साहस किया कि यह राज महल तक पहुंच गई | इन लोगों के लिए किसी भी तरह की विद्या के ज्ञान पर पाबंदी है | फिर भी इसने नृत्य और गाना सिखा | यही इसका अपराध है |
बुद्ध ने कहा – राजन किसी भी पहचान उसके गुणों और कर्मों से होती है | गुणों और कर्मों से यह लड़की सुंदर समझदार साहसी और एक कलाकार है | क्या इसकी कला से खुश होकर तुमने इसे वचन नहीं दिया | और उसने मांगा भी तो क्या, अपने लिए तो कुछ नहीं मांगा | अपने लोगों के लिए मांगा | तो इस कर्म से यह कितनी महान हो जाती है |
और तुम राजन – तुम्हारी कर्म क्या है | वचन देकर भी पीछे हट गए | जिसे इनाम देना था | उसे मृत्युदंड देने चले | जिसकी प्रशंसा करनी चाहिए | उसकी बुराई कर रहे हो | मेरी नजर में यह लड़की अछूत नहीं | अछूत तो तुम हो|
इस लड़की के सामने तुम्हारे कर्म बहुत छोटे हैं राजन |
राजा बुध के सामने शर्मिंदा हो गया और वह कुछ ना बोल सका और बस इतना कह कर यह लड़की आज से अभय रहेगी | इसकी सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी है | वह राजा वहां से चला गया |
उस लड़की ने बुद्ध से कहा – हे बुद्ध क्या आप इस जाति प्रथा को नहीं मानते | क्या आपको हम अछूतों के साथ रहने पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा | लोग कहते हैं कि हमारा साया जिन पर पड़ जाता है | वह भी पापी हो जाते है |
बुद्ध मुस्कुराए और बुद्ध ने कहा – पुत्री याद रखना हमारे कर्म ही हमें ऊंचा या नीचा बना सकते है | जन्म से कोई ऊंचा नीचा नहीं होता | हम सब एक ही है | यह प्रकृति हमारा पालन-पोषण भी एक जैसा ही करती है | यह हम में कोई भेदभाव नहीं करती | भेदभाव करना हम मनुष्यों का स्वभाव बन गया है | और इसे बदलना ही होगा |
याद रखना जीवन में कितनी भी कठिनाई हो | दुख हो, कोई भी परिस्थिति हो, कभी भी हार मत मानना जो हार नहीं मानते, एक दिन वह जीत ही जाते हैं | उसे पा ही लेते हैं, जो उन्हें चाहिए , लेकिन जो हार कर बैठ गए , वह कभी नहीं जीत पाएंगे | वह हमेशा हारे हुए ही रहेंगे | वह उसे कभी नहीं पा सकेंगे, जो उन्हें चाहिए, बल्कि उनसे वह भी छीन लिया जाएगा जो उनके पास है | इसलिए हमेशा कोशिश करते रहना चाहिए | सफलता अवश्य मिलेगी |
Very inspirational story sir Namo Buddhay sir ji 🙏